सफलता चुनाव हे न की ईश्वरीय देन,अर्थात किस लक्ष्य की सफलता साधक की इच्छा पर ही निर्भर हे, और लक्ष्य की सफलता कार्य का न केवल संपादन वरन उस को किस मानसिकता या हेतु के साथ पूरा किया गया हे यह महत्वपूर्ण हे ,मानसिकता से मेरा आशय हे जिम्मेदारी कार्य के प्रति,स्वामित्व की भावना के साथ कार्य ,चातुर्यता के साथ एवं समन्वय के साथ कार्य,किसी कार्य का पहल ये सभी वो तत्वाहे जो मानसिकता को दर्शाते हे ,जो कार्य के श्रेष्टता की और अग्रसित करते हे
इसका सबसे सही उदाहरण हे "चेतक" की स्वामिभक्ति ,चेतक की स्वामिभक्ति उसकी दासता नहीं थी वरन उसकी स्वामित्व की भावना थी
बीरबल भी उसका बड़ा उदहारण हे जो केवल स्वामी के आदेशो की अंध पलना नहीं करते हुए उसमे अपनी बुद्धि कुशलता से पूर्ण करता था .
मेरा टोपिक हे "गर्व के साथ जिम्मेदारी का निर्वहन "
स्वामित्व में तिन महत्वपूर्ण बातो का होना अति आवश्यक हे ,
१ उत्तरदायित्व
२ भरोसेमंद
३ कार्य के प्रति ईमानदारी
उत्तरदायित्व -
किसी भी लक्ष्यित कार्य की पूर्णता तभी संभव जब उसमे व्यक्ति अपने सारे प्रयासों एवं क्षमताओ का उपयोग करे और लक्ष्य के पुरे परिणाम के प्रति भी उतना ही जिम्मेदार हो
भरोसेमंद
जिस व्यक्ति को उत्तरदायित्व को सौपने के बाद या लेने के बाद उस व्यक्ति पर कार्य की पूर्णता का भरोसा होना और वास्तविक में उस पर पूरा खरा उतरना
कार्य के प्रति ईमानदारी
सोपे गए कार्य को श्रेष्ठतम तरीके से पूर्णता की और ले जाना ही कार्य के प्रति ईमानदारी का द्योतक हे
उदाहरंस्वरूप
हमारी कंपनी की एक इकाई हे कंप्यूटर ओपरेटर की कार्य के प्रति स्वामित्व
वह उत्तरदाई हे उसके अनुरक्षण ऑपरेशन एवं उपयोगिता
कार्य का न केवल संपादन वरन उसके स्त्तोतो जेसे मशीनों ,बिल्डिंग ,स्टाफ की सुरक्षा के साथ अनुरक्षण करना भरोसे को दर्शाता हे
पिकप बोयस की भूमिका कार्य की ईमानदारी का श्रेष्ट उदाहरण हे
किसी भी कंपनी की सफलता में स्वामित्व का महत्वपूर्ण स्थान हे यह गुण किसी व्यक्ति के लिए नहीं वरन पूरी टीम के लिए हे
सबसे महत्वपूर्ण हे यह एक माहोल के द्वारा विकसित किया जाता हे
"स्वामित्व एक भावना हे कोई क्षमता नहीं हे "
Friday, April 16, 2010
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